Hindu temple :- एक ऐसा मंदिर जो मंदिर होकर भी जहां आजतक कभी नहीं हुई पूजा, जहां धार्मिक अनुष्ठान पर है पूर्णतः प्रतिबन्ध ।

भारत को “इंडिया इस लैंड ऑफ मिस्ट्रीज” यू ही नही कहा जाता । भारत में स्थित एक ऐसा Hindu temple जहाँ आज तक पूजा नही की गई है । जहां धार्मिक अनुष्ठान पूर्णतः प्रतिबन्धित है । हम बात कर रहे है ,कोणार्क के सूर्य मंदिर के बारे में आइए जानते है कुछ रोचक तथ्य इस Hindu temple से संबंधित।

हाइलाइट्स:-

  • कोणार्क का सूर्य मंदिर, भारत के उड़ीसा राज्य के पुरी जिले के पुरी नामक शहर में स्थित है
  • इस Hindu temple को युनेस्को द्वारा सन 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था
  • कोणार्क मंदिर का निर्माण 1253 से 1260 ई. के बीच हुआ था
  • इस मंदिर में पूजा या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान पर पूर्णतः प्रतिबन्ध है

कोणार्क का सूर्य मंदिर:-

लोकल मान्यताओं के आधार पर, इस Hindu temple का निर्माण 13 वीं शताब्दी में गंग वंश के महान शासक राजा नरसिम्हदेव प्रथम ने अपने शासनकाल 1243-1255 ई. के दौरान 1200 कारीगरों की मदद से कोणार्क के सूर्य मंदिर का निर्माण कराया था। चूंकि गंग वंश के शासक सूर्य की पूजा करते थे, इसलिए कलिंग शैली में निर्मित इस मन्दिर में सूर्य देवता को रथ के रूप में विराजमान किया गया है तथा पत्थरों को उत्कृष्ट नक्काशी के साथ उकेरा गया है।

इस Hindu temple का निर्माण लाल रंग के बलुआ पत्थरों तथा काले ग्रेनाइट के पत्थरों से हुआ है। पूरे मन्दिर स्थल को बारह जोड़ी चक्रों के साथ सात घोड़ों द्वारा खींचते हुए निर्मित किया गया है, जिसमें सूर्य देव को विराजमान दिखाया गया है। वर्तमान समय में सात घोड़ों में से सिर्फ एक ही घोड़ा बचा हुआ है। आज जो मंदिर मौजूद है वह आंशिक रूप से ब्रिटिश भारत युग की पुरातात्विक टीमों के संरक्षण के कारण बच पाया है।

Hindu temple

पौराणिक कथा के अनुसार:-

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण के पुत्र सांबा को अपने पिता के श्राप के कारण कुष्ठ रोग हो गया था। साम्बा ने मित्रवन में चंद्रभागा नदी के सागर संगम पर कोणार्क में 12 वर्षों तक तपस्या की और सूर्य देव को प्रसन्न किया था जिससे उनकी बीमारी ठीक हो गई। इसका आभार प्रकट करने के लिए उन्होंने सूर्य के सम्मान में एक मंदिर बनाने का फैसला किया। अगले दिन नदी में नहाते समय उन्हें भगवान की एक प्रतिमा मिली, जो विश्वकर्मा द्वारा सूर्य के शरीर से निकाली गई थी।

सांबा ने यह चित्र मित्रवन में उनके द्वारा बनाए गए मंदिर में स्थापित किया, जहाँ उन्होंने भगवान को प्रवचन दिया। तब से यह स्थान पवित्र माना जाता है और कोणार्क के सूर्य मंदिर के रूप में जाना जाता है।कोणार्क सूर्य मंदिर को UNSECO वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में भी जोड़ा गया है।

कहाँ स्थित है कोणार्क सूर्य मंदिर:-

कोणार्क सूर्य मंदिर भारत के ओडिशा के तट पर पुरी से लगभग 35 किलोमीटर उत्तर पूर्व में कोणार्क में 13 वीं शताब्दी का एक प्रतिष्ठित सूर्य मंदिर है। जो चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित है।

Hindu temple कोणार्क सूर्य मंदिर के रोचक बाते :-

मंदिर के शीर्ष पर एक भारी चुंबक रखा गया था और मंदिर के हर दो पत्थर लोहे की प्लेटों से सुसज्जित हैं। कहा जाता है कि मैग्नेट के कारण मूर्ति हवा में तैरती हुई दिखायी देती है।

सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना जाता है। कोणार्क का सूर्य मंदिर रोगों के उपचार और इच्छाओं को पूरा करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

कोणार्क का सूर्य मंदिर ओडिशा में स्थित पांच महान धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है जबकि अन्य चार स्थल पुरी, भुवनेश्वर, महाविनायक और जाजपुर हैं।

कोणार्क के सूर्य मंदिर की विशेषता यह है कि इस मंदिर के आधार पर 12 जोड़ी पहिए स्थित हैं। वास्तव में ये पहिये इसलिए अनोखे हैं क्योंकि ये समय भी बताते हैं। इन पहियों की छाया देखकर दिन के सटीक समय का अंदाजा लगाया जा सकता है।

इस मंदिर में प्रत्येक दो पत्थरों के बीच में एक लोहे की चादर लगी हुई है। मंदिर की ऊपरी मंजिलों का निर्माण लोहे की बीमों से हुआ है। मुख्य मंदिर की चोटी के निर्माण में  52 टन चुंबकीय लोहे का उपयोग हुआ है। माना जाता है कि मंदिर का पूरा ढाँचा इसी चुंबक की वजह से समुद्र की गतिविधियों को सहन कर पाता है।

माना जाता है कि कोणार्क मंदिर में सूर्य की पहली किरण सीधे मुख्य प्रवेश द्वार पर पड़ती है। सूर्य की किरणें मंदिर से पार होकर मूर्ति के केंद्र में हीरे से प्रतिबिंबित होकर चमकदार दिखाई देती हैं।

कोणार्क सूर्य मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों और दो विशाल शेर स्थापित किए गए हैं। इन शेरों द्वारा हाथी को कुचलता हुआ प्रदर्शित किया गया है प्रत्येक हाथी के नीचे मानव शरीर है। जो मनुष्यों के लिए संदेश देता हुए मनमोहक चित्र है।

कोणार्क के सूर्य मंदिर परिसर में नाटा मंदिर यानि नृत्य हाल भी देखने लायक है।

मंदिर की संरचना और इसके पत्थरों से बनी मूर्तियां कामोत्तेजक मुद्रा में हैं जो इस मंदिर की अन्य विशेषता को प्रदर्शित करता है।

Hindu temple

क्यो नही की जाती पूजा इस Hindu temple मे :-

आश्चर्य कि बात है , एक तरफ़ जिसे मंदिर कहा जाये वहीं पूजा न हो ये भी किसी अचम्भे से कम नहीं है। यहां के स्थानीय लोगों की अगर माने तो आज तक इस मंदिर में कभी पूजा नहीं हुई और अब तक ये मंदिर एक “वर्जिन मंदिर” है।
कहा जाता है की मंदिर के प्रमुख वास्तुकार के पुत्र ने राजा द्वारा उसके पिता के बाद इस निर्माणाधीन मंदिर के अंदर ही आत्महत्या कर ली जिससे बाद से इस मंदिर में पूजा या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगा दिया गया।

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