G20 Summit: कैसे बनाई भारत ने पहले दिन ही घोषणा-पत्र पर आम सहमति?

G20 Summit: पहला दिन भारत के नाम

आमतौर पर इस सालाना शिखर सम्मेलन के अंत में घोषणा पत्र जारी किया जाता है, लेकिन इस बार पहले दिन ही सहमति की घोषणा की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने G20 के मीडिया सेंटर में एक बयान दिया, जिसमें उन्होंने घोषणा पत्र पर सभी देशों की सहमति की घोषणा की। इस खबर का स्वागत पत्रकारों ने तालियों से किया। इसके बाद, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया सेंटर में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस आयोजित की और इस घोषणा पत्र के बारे में और विस्तार से बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस डिक्लेरेशन को भी अपने प्रस्ताव के रूप में प्रस्तुत किया और उसकी अद्भुत सहमति की घोषणा की।

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पिछले साल बाली सम्मेलन के घोषणा पत्र में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी। बाद में रूस और चीन ने G20 के मंच से रूस की निंदा पर आपत्ति जताना शुरू कर दिया।

इसके बाद G20 अध्यक्षता भारत को सौंपी गई। तब से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि सम्मेलन के घोषणा पत्र पर सभी देशों की सहमति बनाना मेजबान भारत के लिए काफी कठिन होगा।

G20 Summit:

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भारत की अध्यक्षता में G20 के वित्त मंत्रियों और विदेश मंत्रियों के सम्मेलनों के बाद घोषणा पत्र पर सहमति नहीं बन सकी थी।

पश्चिमी देश चाहते थे कि यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस की सभी सदस्य देश कड़ी निंदा करें, लेकिन रूस और चीन ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण सामूहिक तौर पर घोषणा पत्र जारी नहीं किया जा सका था।

भारत के शेरपा अमिताभ कांत ने भी स्पष्ट किया था कि जी-20 के मंच को यूक्रेन में जारी जंग को मुद्दा न बनाया जाए, उनका कहना था कि यूक्रेन की जंग यूरोप की जंग है और विकासशील देशों के लिए आर्थिक संकट है।

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