BRICS Summit 2023: PM Modi दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना , मोदी-जिनपिंग की हो सकती है मुलाकात ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब हाल ही में दक्षिण अफ्रीका की ओर रवाना हुए हैं, जहाँ वे BRICS Summit 2023 में भाग लेने के लिए पहुँचे हैं। इस सम्मेलन का आयोजन 22 से 24 अगस्त तक किया जाएगा और यहाँ पर ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेता एकत्र हो रहे हैं।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति माटामेला सिरिल रामफोसा ने प्रधानमंत्री मोदी को इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था और प्रधानमंत्री मोदी ने ख़ुशी ख़ुशी इस आमंत्रण को स्वीकार किया। यह पीएम मोदी की तीसरी दक्षिण अफ्रीका यात्रा है और इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सहयोग और सहमति को मजबूती देना है। यहां पर अब दक्षिण अफ्रीका ने कहा है कि वह भी अब भारत वाली लाइन पर चलेगा

क्या है भारत वाली लाइन

BRICS Summit 2023 में भारत वाली लाइन की चर्चाएं हैं पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भारत की विदेश नीति की आधारभूत बुनियाद को गुटनिरपेक्षता में रखी थी। उनका मानना था कि भारत किसी भी गुट में नहीं शामिल होगा, बल्कि अपने हितों के आधार पर सभी गुटों के साथ रहेगा। विदेश मंत्री अब इस नीति को मल्टीअलाइनमेंट यानी बहुध्रुवीय यात्रा के रूप में बदल रहे हैं। इसका मतलब है कि भारत एक ही गुट के साथ नहीं बल्कि सभी गुटों के साथ अपने आपके हितों के प्रति संवेदनशील रहेगा।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद, भारत की विदेश नीति पर बड़ी परीक्षा थी। हालांकि भारत ने नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति को ही मान्यता दी और मुश्किल समय में उसी के आधार पर निर्णय लिया। यहाँ तक कि उन्होंने हंगरी में सोवियत हस्तक्षेप के बाद भारत की यूएसएसआर की निंदा नहीं की, क्योंकि उनका मानना था कि जब समस्या का समाधान ढूंढा जा रहा होता है, तो निंदा से मदद नहीं मिलती।

शीत युद्ध के समय, भारत न तो सोवियत संघ के साथ था और न ही अमेरिकी खेमे में। यह दिखाता है कि भारत की नीति हमेशा अपने हितों के आधार पर तय की गई है, चाहे वो किसी भी गुट के साथ हो। दुनियाभर के देश अब इस नीति को अपना रहे हैं, जैसा कि दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब ने भी दिखाया है।

ब्रिक्स सम्मेलन के पहले सदस्य देशों ने विचार किया कि वे क्या एक गुटनिरपेक्ष क्लब के रूप में काम करें जो विकासशील देशों के आर्थिक हितों का समर्थन करता है, या फिर उन्हें पश्चिमी देशों के प्रति चुनौती देने वाली एक राजनीतिक ताकत के रूप में उभारना चाहिए।

इस प्रकार, भारत की विदेश नीति का मूल सिद्धांत हमेशा अपने हितों के प्रति संवेदनशील रहने पर आधारित रहा है, चाहे वो गुटनिरपेक्षता में हो या फिर मल्टीअलाइनमेंट में।

BRICS Summit 2023 में क्या मोदी करेंगे द्विपक्षीय बैठकें

पीएम नरेंद्र मोदी जोहान्सबर्ग में द्विपक्षीय बैठकों के साथ मौजूद नेताओं के साथ वार्ता करेंगे। 15वें BRICS Summit 2023 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी वर्चुअली शामिल होंगे, जबकि रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव करेंगे। उन्हें ‘ब्रिक्स-अफ्रीका आउटरीच और ब्रिक्स प्लस संवाद’ विषय पर एक विशेष कार्यक्रम में भाग लेने का भी मौका मिलेगा। जिसमें दर्जनों देशों की भागीदारी होगी, जिनमें अधिकांश अफ्रीकी महाद्वीप के हैं। पूरे कार्यक्रम के बाद जोहान्सबर्ग से गुजरने के बाद, पीएम मोदी 25 अगस्त को ग्रीस के प्रधानमंत्री के आमंत्रण पर ग्रीस यात्रा के लिए रवाना होंगे।

उन्होंने कहा BRICS Summit 2023 जोहान्सबर्ग में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद प्रधानमंत्री ग्रीस के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर 25 अगस्त को आधिकारिक यात्रा के लिए ग्रीस जाएंगे

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