Protest : सीरिया मे तानाशाह के खिलाफ लोगो मे आक्रोश , हो सकता है तख्तापलट?

साल 2011 में अरब स्प्रिंग ने कई अरब मुल्कों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। और इस protest ने खाड़ी के कई देशों की सरकार को बदल दिया ट्यूनीशिया के शासक जिने अल-आबिदीन बेन अली को देश छोड़ना पड़ा, लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी की मौत हो गई और मिस्र में राष्ट्रपति होस्नी मुआबरक ने दशकों तक शासन किया था। हालांकि, इस समय सीरिया एक ऐसा देश बन गया था जिसे अरब protest का कोई प्रभाव नहीं पहुंचा।

अब से 12 साल पहले की तरह, सीरिया में एक बार फिर से बगावत की आशंका है। लोग राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन से परेशान हैं। हालांकि पिछले दो हफ्तों से सीरिया में लगातार Protest हो रहे हैं, जिनकी रफ्तार तेज़ हो रही है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि राष्ट्रपति असद को अपने पद से अस्थायी रूप से हटना चाहिए।

द्रूज समुदाय का Protest

दक्षिणपश्चिम सीरिया के शहर एस-सुवायदा में दिखे Protest, जिनका मुख्य नेतृत्व द्रूज अल्पसंख्यक समुदाय ने लिया। यही वो क्षेत्र था जिससे असद को गृहयुद्ध में समर्थन मिला था, लेकिन अब वही इलाका उनके खिलाफ उठा बगावत की ओर। माइनॉरिटी राइट्स ग्रुप इंटरनेशनल के अनुसार, द्रूज समुदाय सीरिया के तीसरे सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय में आते हैं, जिनका आबादी में 3 से 4 फीसदी का हिस्सा है। गृहयुद्ध के दौरान साथ खड़े होने वाले इस समुदाय ने अब असद के खिलाफ Protest प्रकट किया है।

Protest

असद की सत्ता पकड़

जुलाई 2000 से ही राष्ट्रपति बने हुए हैं बशर अल-असद, सीरिया के पिछले 23 सालों से सत्ता में। उन्होंने अपने पिता हाफिज अल असद से विरासत में सीरिया की सत्ता निभाई है। वर्ष 2011 में यह लगा कि शायद असद को सत्ता छोड़नी पड़ेगी, पर ऐसा नहीं हुआ। तब से अब तक, उन्होंने सत्ता की कड़ी पकड़ बनाई हुई है और लोग उन्हें ‘तानाशाह’ के रूप में देखते हैं। इसका कारण यह है कि गृहयुद्ध के दौरान उन्होंने Protest करने वालो पर कड़ी कार्रवाई की थी।

Protest की वजह?

सीरिया में अर्थव्यवस्था बुरी स्थिति में है, जैसा कि अल जजीरा ने रिपोर्ट किया है। महंगाई बढ़ रही है और लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। Protest की शुरुआत महंगाई और आर्थिक स्थिति के खराब होने के कारण हुई थी। हालांकि अब लोग असद सरकार के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं। कुछ हफ्तों पहले सरकार ने ईंधन और गैस की कीमतों में कटौती की जिससे लोगों का Protest और भी उग्र हो गया।

आम लोगो की क्या है स्थिति?

देश के लोगों की स्थिति दिनों-दिन बिगड़ती जा रही है। असद राष्ट्रपति के कार्यकाल में तेजी से बढ़ती दौलत के बावजूद, आम जनता के जीवनमान में सुधार नहीं हो पा रहा है। गृहयुद्ध के नतीजे स्वागतनीय नहीं रहे हैं, क्योंकि लोगों की आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ी है।

दो करोड़ से अधिक लोगों को युद्ध के परिणामस्वरूप घरों से निकलकर अन्य स्थानों में जाना पड़ा है, जिससे उनकी समस्याएं और भी बढ़ गई हैं। देश की आधारभूत ढांचे में कमी आ गई है और इससे लोगों का जीवन और भी कठिन हो गया है।

वर्तमान में, देश की आबादी के लगभग 90 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, जो एक चिंताजनक संकेत है। भ्रष्टाचार की समस्या और पश्चिमी प्रतिबंधों के परिणामस्वरूप देश की स्थिति और भी खराब हो चुकी है। आम लोगों के लिए दो वक्त की भोजन में भी परेशानियाँ बढ़ गई हैं।

हो सकता है तख्तापलट?

इटली के फ्लोरेंस में स्थित यूरोपियन यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर और रिसर्चर जोसेफ डाहर ने बताया कि अलजजीरा से उनकी बातचीत में यह बात सामने आई है कि सीरिया में तख्तापलट या सरकार का पतन अब तक दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने यह भी जताया कि इसका कारण यह है कि प्रदर्शनकारी अभी तक एकत्र नहीं हो पाए हैं। वे मानते हैं कि विभिन्न शहरों में हो रहे Protest के नेतृत्व करने वालों को मिलकर काम करना आवश्यक है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक असद की सत्ता पर कोई खतरा नहीं उत्पन्न होता।

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