mob lynching और नाबालिग से रेप के लिए मृत्युदंड : अमित शाह ने लोकसभा में बिल पेश किया

संसद के मानसून सेशन के आखिरी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन नए बिल पेश किए। जो mob lynching और नाबालिग से रेप के लिए मृत्युदंड लाने व देशद्रोह के कानून को खत्म करने के लिए है।

इसमें भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य बिल 2023 बिल शामिल हैं। ये बिल अंग्रेजों के समय के इंडियन पीनल कोड (IPC), कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (CrPC) और एविडेंस एक्ट की जगह लेंगे

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2027 से पहले देश की सभी कोर्ट को कंप्यूटराइज करेंगे. किसी भी शख्स को गिरफ्तार किया जाएगा तो उसके परिवार वालों को तुरंत जानकारी दी जाएगी और इसके लिए एक ऐसा पुलिस अधिकारी नियुक्त किया जाएगा

[11/08, 6:37 pm] .: संसद के मानसून सेशन के आखिरी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन नए बिल पेश किए। इनमें भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य बिल 2023 बिल शामिल हैं। ये बिल अंग्रेजों के समय के इंडियन पीनल कोड (IPC), कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर (CrPC) और एविडेंस एक्ट की जगह लेंगे

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2027 से पहले देश की सभी कोर्ट को कंप्यूटराइज करेंगे. किसी भी शख्स को गिरफ्तार किया जाएगा तो उसके परिवार वालों को तुरंत जानकारी दी जाएगी और इसके लिए एक ऐसा पुलिस अधिकारी नियुक्त किया जाएगा

नाबालिग से रेप और मॉब लिंचिंग के लिए मृत्युदंड :

मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए तीन बिलों में से एक बिल का मुख्य उद्देश्य मॉब लिंचिंग और नाबालिग से दुष्कर्म पर सख्त कानूनी कार्रवाई को बढ़ावा देना है।

इस बिल में सजा के प्रावधान को लेकर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस नए बिल में मॉब लिंचिंग को हत्या की परिभाषा में शामिल किया गया है। यदि किसी समूह ने जाति, समुदाय, लिंग, भाषा आदि के आधार पर पांच या उससे अधिक लोगों ने मिलकर किसी की हत्या की है, तो उन्हें मॉब लिंचिंग के तहत दोषी माना जाएगा।

ऐसे अपराधियों को सात साल की कैद और अधिकतम मौत की सजा के साथ सजा दी जा सकेगी।

साथ ही, सामूहिक दुष्कर्म के मामलों में भी सजा को कई गुना बढ़ा दिया गया है। अब ऐसे आरोपियों को बीस साल तक की कैद या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। इससे उन लोगों को जो सामूहिक रूप से दुष्कर्म करते हैं, उन्हें और भी कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा।

इस नए बिल में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि 18 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। यह सजा उन लोगों के लिए लगेगी जो किसी नाबालिग के साथ रेप करते हैं और उसकी मौत का कारण बनते हैं।

इन तीनों बिलों के माध्यम से सरकार ने जाति, समुदाय, लिंग, भाषा आदि के आधार पर होने वाले अपराधों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की संभावना को बढ़ावा दिया है और इससे समाज में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

अंग्रेजो के टाइम का देशद्रोह कानून होगा समाप्त :

गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में तीन बिल पेश किए. तीन बिल पेश करते हुए सदन में अमित शाह ने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के आपराधिक क़ानून बदले जाएंगे, 1860 का आईपीसी को बदला जाएगा. उसकी जगह भारतीय न्याय संहिता लेगी. दंड प्रक्रिया संहिता की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लेगी

आगे उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत हम देशद्रोह जैसे कानून निरस्त कर रहे हैं। अमित शाह ने कहा कि 1860 से 2023 तक देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था अंग्रेजों के बनाए कानून से चल रहा था।

अब इन तीन नए कानूनों से देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। इस विधेयक के तहत हमने लक्ष्य तय किया है कि दोषसिद्धि की दर को 90 प्रतिशत से ज्यादा किया जाएगा। अपराध स्थल पर फोरेंसिक टीम का जाना अनिवार्य होगा। नए विधेयक में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने के मामले से संबंधित नए प्रावधान किए गए हैं।

also read : I.N.D.I.A गठबंधन का pm Modi के आगे लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव गिरा

Leave a Reply