Delhi services bill : दिल्ली सर्विस बिल हुआ पास , केजरीवाल को लगा झटका, केन्द्र को मिलेगी ताकत,

सोमवार को राज्यसभा में आरोप प्रत्यारोप के बीच आखिर Delhi service bill पास हो गया , बिल के समर्थन में 131 वोट पड़े और विरोध में 102

राज्यसभा में बीजेपी को बहुमत की कमी होने के बावजूद बीजेपी को Delhi services bill पर अन्य पार्टी का समर्थन मिला जिसमें ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी ने बीजेपी को समर्थन देकर भविष्य में साथ गठबंधन की संभावना को बढ़ा दिया है।

राज्यसभा में महत्वपूर्ण दिल्ली सर्विस बिल के मतदान के समय की एक तस्वीर ने सभी की नजरें आकर्षित की। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी वहाँ व्हील चेयर पर मौजूद थे। आम आदमी पार्टी के पास 10 सांसद होने के बावजूद उन्होंने दिल्ली सर्विस बिल के खिलाफ उठाए गए मुद्दे में 102 सांसदों का समर्थन प्राप्त किया।

मनमोहन सिंह की मौजूदगी कांग्रेस के बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की दिशा में एक नई मोड़ दिखा सकती है। इससे कांग्रेस की बीजेपी के खिलाफ प्रतिबद्धता को भी समझा जा सकता है

इस बिल के विरोध में INDIA गठबंधन ने भी एकता दिखाई है। यह गठबंधन हाल ही में गठित हुआ है और उसमें शामिल किसी ने भी क्रॉस वोटिंग नहीं किया।

दिल्ली सर्विस बिल के पास होने के बाद यह अब राष्ट्रपति के पास जाएगा और उसके हस्ताक्षर के बाद यह क़ानून लागू हो जाएगा। इसका असर दिल्ली के प्रशासनिक कार्यों पर व्यापक रूप से पड़ेगा, जिससे नागरिकों को और बेहतर सेवाएं मिल सकें।

Delhi services bill पर AAP को मिला INDIA गठबंधन का पूरा साथ

दिल्ली सर्विस बिल के पास होने से दिल्ली में आम आदमी पार्टी के अधिकार जरूर कम हुए है, लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक दलों के बीच इंडिया गठबंधन ने भी अपने महत्वपूर्ण संदेश को सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया है। की इस गठबंधन में सब एक साथ है।

इंडिया गठबंधन के गठन को एक महीना हो गया है और संसद के दोनों सदनों में इस गठबंधन की मजबूती और एकता का संकेत मिल रहा है।

कांग्रेस, डीएमके, एनसीपी, शिवसेना (उद्धव ठाकरे), आरजेडी, जेडीयू और इंडिया के बाकी सहयोगी दलों ने इस गठबंधन का समर्थन किया है। राज्यसभा में बिल के खिलाफ 102 वोटों की विरोधी मतदान होने का मतलब है कि इस गठबंधन में शामिल किसी भी पार्टी के सदस्य ने क्रॉस वोटिंग नहीं की

यह सफलता इस नए राजनीतिक मोर्चे के पीछे के राजनीतिक उद्देश्यों की पुष्टि करती है, जिसमें इंडिया गठबंधन ने बीजेपी को एक मजबूत चुनौती देने के लिए सामंजस्य दलों को एकजुट किया है। साथ ही गठबंधन ने यह दिखाया है कि विभिन्न दलों की एकता से उन्हें बड़ी ताक़त मिल सकती है।

क्या है delhi service bill, क्यों केजरीवाल सरकार कर रही है विरोध

इस बिल के कारण केजरीवाल सरकार कि शक्ति में कमी आएगी और केन्द्र सरकार की शक्ति बढ़ेगी इसी कारण केजरीवाल सरकार इसका विरोध कर रही हैं।

विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच दिल्ली सेवा बिल 2023 को लेकर बहस जारी है। इसे लोकसभा में सत्र के दौरान गुरुवार को मान्यता प्राप्त हुई थी। इसके पारित होने के बाद, दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों की तबादले और पोस्टिंग पर उपराज्यपाल को जिम्मेदारी होगी। इस बिल ने उपराज्यपाल (एलजी) को विवेकपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार दिया है।

नौकरशाहों के संबंधित मामलों में तबादलों, पोस्टिंग और अन्य अनुशासनात्मक पहलुओं पर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच विवाद चल रहा है। इसका परिणामस्वरूप, केंद्र सरकार इस बिल को पारित करने की कोशिश कर रही है।

एनसीसीएसए में मुख्यमंत्री, दिल्ली के मुख्य सचिव, और दिल्ली के प्रधान गृह सचिव शामिल होंगे, जो उपराज्यपाल को अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग की सिफारिश करेंगे। इसके अलावा, दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक मामलों पर भी उपराज्यपाल (एलजी) को सिफारिशें करने का अधिकार होगा।

इस बिल से उपराज्यपाल को प्रमुख विधायिका और प्रशासनिक मामलों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त होता है, जिससे दिल्ली सरकार की शक्तियों में कटौती हो सकती है। इसके साथ ही, यह भारतीय राष्ट्रपति को संघ सूची से संबंधित संसदीय कानूनों के लिए अधिकारियों, बोर्डों, आयोगों, निकायों या पदाधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार प्रदान करता हैं

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