Delhi Liquor Scam दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम सिसोदिया को अंतरिम जमानत नहीं, SC ने मामला 4 सितंबर तक टाला

सीबीआई ने दाखिल हलफनामे में कहा था कि मनीष सिसोदिया भ्रष्टाचार के गंभीर केस के आरोपी हैं और उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि वह राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति है.

मनीष सिसोदिया :

Delhi Liquor Scam

Delhi Liquor Scam मामले में  मनीष सिसोदिया को SC से बड़ा झटका लगा है. उन्हें फिलहाल अंतरिम जमानत नहीं मिली है, कोर्ट ने मामला 4 सितंबर तक के लिए टाल दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो याचिका खारिज नहीं कर रहे हैं.  दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की ED और सीबीआई दोनों मामले में जमानत पर  सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.  जस्टिस संजीव खन्ना की अगुआई वाली बेंच ने सुनवाई की

Delhi Liquor Scam सीबीआई हलफनामा

अभिषेक मनु सिंघवी ने उनकी मेडिकल रिपोर्ट पढ़ कर सुनाई. वह पीठ में दर्द, चलने-फिरने में असमर्थ हैं. कोर्ट ने कहा है कि  मरीज इंडोर है या आउटडोर. सिंघवी आउट डोर है. इस पर कोर्ट ने कहा कि हम अंतरिम जमानत अर्जी खारिज नहीं कर रहे. ये बीमारी कंट्रोल करने से नियंत्रण में रहती है. उन्हें एम्स या अन्य बड़े अस्पतालों में ले जाने में हमें कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि बीमारी और उसकी गंभीरता से हम इंकार नहीं कर रहे, लेकिन ये जमानत का आधार नहीं हो सकता.

हालांकि सीबीआई ने दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत का विरोध किया और इसको लेकर हलफनामा भी  दाखिल किया है. दाखिल हलफनामे में कहा है कि सिसोदिया भ्रष्टाचार के गंभीर केस के आरोपी हैं. सिसोदिया को जमानत नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि वह राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं.  इसके अलावा उनकी पत्नी की बीमारी कोई नई बात नहीं है, बल्कि उनका इलाज 23 साल से चल रहा है.

Delhi Liquor Scam: मनीष सिसोदिया को अंतरिम जमानत खारिज : SC ने मनीष सिसोदिया को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है और कहा है कि हम नियमित जमानत पर 4 सितंबर को सुनवाई करेंगे.  सुप्रीम कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि पत्नी का स्वास्थ्य इतना गंभीर नहीं है कि सिसोदिया को अंतरिम जमानत दी जा सके.

सीबीआई, ईडी से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा सुप्रीम कोर्ट ने :-

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सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी राजू से कहा कि  हम नियमित जमानत की सुनवाई के साथ-साथ अंतरिम जमानत पर भी विचार करेंगे, जब हम नियमित जमानत की सुनवाई करेंगे तो हम नीतिगत निर्णय, मनी ट्रेल, सबूतों के साथ छेड़छाड़ के बारे में विवरण जानना चाहेंगे.  जब नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई होगी तो हम मनी ट्रेल की स्पष्ट स्थापना चाहते हैं.  यह आपके हलफनामे से स्पष्ट नहीं है. सीबीआई, ईडी को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है.

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